खुली हवा में साँस ले लो...
ज़िन्दगी आज इतनी व्यस्त हो गयी है की अपनों के लिए भी समय नहीं है|
बंद कमरे में सिमट गयी है ज़िन्दगी..
एक बार कमरे की खिड़की खोल के देखो कितनी ख़ूबसूरत सी है ये दुनिया...
मौसम बदलते है...सिर्फ कैलेंडरों में नहीं..
दोस्त रिश्तेदार भी हैं पर सिर्फ फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर नहीं..
एक बार खुली हवा में साँस ले के देखो...
" गुलमोहर आज भी उतना ही ख़ूबसूरत है..
आसमान भी आज उतना ही नीला है...
बारिश की बूंदें आज भी सुकून दे जाती है..
गर्मी में अब भी सूरज तपता है..
जाड़े में अब भी धुप का इंतज़ार करते है..
बसंत आज भी पतझर के बाद आता है......
सब आज वही है.. बस तुम आगे निकल गए हो..
मुड़ के देख लो एक बार...
शायद कल को देखने को तरस जाओगे पर........
ये पल महसूस ना कर पाओगे.."
बंद कमरे में सिमट गयी है ज़िन्दगी..
एक बार कमरे की खिड़की खोल के देखो कितनी ख़ूबसूरत सी है ये दुनिया...
मौसम बदलते है...सिर्फ कैलेंडरों में नहीं..
दोस्त रिश्तेदार भी हैं पर सिर्फ फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर नहीं..
एक बार खुली हवा में साँस ले के देखो...
" गुलमोहर आज भी उतना ही ख़ूबसूरत है..
आसमान भी आज उतना ही नीला है...
बारिश की बूंदें आज भी सुकून दे जाती है..
गर्मी में अब भी सूरज तपता है..
जाड़े में अब भी धुप का इंतज़ार करते है..
बसंत आज भी पतझर के बाद आता है......
सब आज वही है.. बस तुम आगे निकल गए हो..
मुड़ के देख लो एक बार...
शायद कल को देखने को तरस जाओगे पर........
ये पल महसूस ना कर पाओगे.."
Nice post 👍
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