हैप्पी फादर्स डे ! पापा
अगर कोई मुझसे पूछता है कि मेरा हीरो कौन है ? तो एक ही चेहरा उभर कर सामने आता है पापा का | पापा के पास कोई सुपरमैन जैसी कोई पॉवर तो नहीं है पर उनके पास हर परिस्थियों से लड़ने की सीख जरूर होती है| मुझे पांच साल हो गये हैं , घर से बाहर रहते हुए | पापा से बहुत कम बात होती है | पर , जब कभी सबसे ज्यादा परेशान होती हूँ तो फ़ोन में उन्ही का नंबर डायल करती हूँ| उनसे बात करना मतलब एक नयी एनर्जी से खुद को भर लेना| उन्होंने कभी मुझे परेशानियों से भागना नहीं सिखाया बल्कि उनका सामना करना सिखाया है | आज फादर्स डे है और मैं पापा से बहुत दूर हूँ | आज उन्हें कॉल भी किया पर उन्होंने रिसीव नहीं किया | शायद व्यस्त होंगे |
बचपन याद करूँ तो पापा की सुबह- सुबह की झिड़की बड़ी याद आती है, जब वो हमें स्कूल जाने के लिए उठाते थे | मम्मी तो मुझे कभी जगा नहीं पाती थी | तब पापा उठाने आते थे और मैं उंघते , बुदबुदाते हुए कभी बरामदे ,कभी बालकोनी में सोती रहती थी| पर , वो एक जासूस की तरह मुझे हर उस जगह से खोज निकालते थे | आज भी फ़ोन पे उनका यही सवाल होता है कि "सुबह उठती है ना " ? वैसे मैं आज भी सुबह नहीं उठती हूँ| अब तो पापा भी डांटने के लिए नहीं हैं यहाँ | मैं आज भी देर तक सोती हूँ शायद इस उम्मीद में कि पापा दरवाजा पीटेंगे और मुझे बिस्तर से घसीट कर उठाएँगे |

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