जी ले जरा



जी ले जरा ...


आज हम उस युग में जी रहे जहाँ तकनीक ने दुनिया छोटी कर दी है. आज हमारे सामने बैठे दोस्तों से ज्यादा सच्चे सोशल नेटवर्क के दोस्त लगते है. अपने दोस्तों से मिलने के बजाय हमें ऑनलाइन आना ज्यादा पसंद है. हम अपने दोस्तों का हाल-चाल भले ना पूछे पर फेसबुक और व्ह्ट्स एप्प पर चैटिंग जरूर करेंगे.हम खिड़की के बाहर की दुनिया देखे न देखे ..पर सेल्फी जरूर अपलोड करेगे.
सोचने वाली बात है की हम किस दुनिया में जी रहे हैं. यहाँ सच्चे रिश्तों से साइबर रिश्ते ज्यादा अच्छे लगते है. हम एक कमरे में बंद रह के लैपटॉप, मोबाइल और कंप्यूटर पर जरूर लगे रहेंगे पर हर शाम पास के पार्क जा कर खुली हवा में सांस नहीं लेंगे.कितनी अजीब बात है हमें अपने दोस्तों का जन्मदिन भी मोबाइल में रिमाइंडर लगा कर याद करना पड़ता है. तकनीक हमारी सुविधा के लिए आयी ताकि हम हर दिन की परेशानियों से बच सकें. ये नहीं की हम अपने आस-पास की दुनिया को छोड़ एक काल्पनिक दुनिया में जीने लगे. फेसबुक पर जितने लिखे कमेंट्स और लाइक्स हमारी ज़िन्दगी में अहमियत रखते हैं अगर हम उतनी अहमियत खुद को दे तो और अपने सपनों को दे तो कितने आगे तक जायेंगे. ये जो ज़िन्दगी है बहुत छोटी सी है...उसे अपनी काल्पनिक दुनिया से बचा कर रखो. तकनीक को अपनाओ पर उसे खुद पर हावी मत होने दो .
  एक बार लैपटॉप और मोबाइल के स्क्रीन से चहरे को हटा कर देखो ... देखो दुनिया कितनी ख़ूबसूरत है... एक बार देखो हकीकत में क्या है रिश्ते , दोस्ती और सपने ...एक बार ज़िन्दगी को उसके नजरिये से जी के देखो... फेसबुक पर तो हर कोई रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेता है ..एक बार अपने सामने बैठे इंसान से दोस्ती कर के तो देखो .. एक बार जी के तो देखो.....

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