अंतर्मन कुछ कहता है

मेरी वेदना के स्वर क्या तुम्हे सुनाई देते है?
मेरी चिंताएं, मेरे स्वप्न क्या तुम्हे दिखाई देते हैं?
मैं एक कमरे में बंद ,
सिसकियाँ लेती हूँ हर पल
जीवन के ये जो हैं मोड़ घुमावदार,
मुझे विचलित कर देते हैं,
ना साथी , ना संगी ,
ना कोई जिसपे
भरोसा कर पाऊँगी
बस एक अंतर्मन है ,
जो राह दिखा जाता है
खामोश हैं लोग सारे
पर अंतर्मन कुछ कहता है.

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