चीनी वायरस और बेबस विश्व
कोरोना वायरस (COVID-19), जिसने पूरे विश्व को एक ठहराव पर लाकर खड़ा कर दिया है | 471,794 से भी ज्यादा पॉजिटिव केसेस हैं और 21,297 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है | यह एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है और WHO ने इसे महामारी घोषित कर दिया है| इसने पूरे विश्व के आगे कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं ? आखिर क्या है ऐसा, जिसपर हमारा यकीन कर पाना थोडा मुश्किल है | डालते हैं एक नजर
तथ्यों पर गौर करें तो नवम्बर २०१९ में चीन के वुहान से शुरू हुआ मौत का ये तांडव चीन के किसी और शहर में नहीं पहुँचा जबकि ये विश्व के अन्य कई देशों जैसे इटली , ईरान, अमेरिका, स्पेन, भारत तक पहुँच गया है| इसका सबसे बुरा असर इटली पर पड़ा, जहाँ एक पूरी की पूरी पीढ़ी समाप्त हो चुकी है. एक पीढ़ी का मरना अपने आप में कितना दुखद है और एक राष्ट्र के लिए कितना विचलित करने वाला वाकया है |
ब्रिटेन के प्रधानमत्री तक इसकी चपेट में है. जर्मनी के एक नेता ने इसकी वजह से आत्महत्या तक कर ली. भारत पिछले एक हफ्ते से लॉक डाउन में है. सरकार आर्थिक विकास को रोक कर जान बचाने में लगी है | सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका भी इसके आगे बेबस है | तो क्या ये एक तरह का जैविक युद्ध है जिसके लिए चीन कई वर्षों से तैयारियां कर रहा था और क्या हम ये भरोसा कर सकते हैं कि आने वाले समय में चीन या अन्य कोई देश ऐसा फिर नहीं करेगा?
चीन का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गुमराह करना ,तथ्यों को छुपाना, स्पेन में गलत टेस्टिंग किट भेजना | ये सारी बातें उसे कठघरे में खड़ी करती हैं | पूरा विश्व अब भी इस से लड़ रहा है , हर दिन नए लोग इस बीमारी से संक्रमित पाए जा रहे हैं और चीन में मौत का सिलसिला थम चुका है | वुहान वापस पटरी पर लौट रहा है | तो क्या चीन ने इसका तोड़ निकाल लिया है और पूरा विश्व अब भी अनजान है ?
शुरुआत में ऐसा लगता था जैसे ये एक नयी बीमारी है जो चीनी खानपान से जुडी है | वुहान के सी फ़ूड मार्किट को इसका स्रोत बताया गया जिसे १ जनवरी २०२० को बंद कर दिया गया |पर जैसे जैसे हम तथ्यों पर गौर करते हैं तब समझ आता है ये एक जैविक हथियार है | सार्वजनिक रूप से बाहर आने और सिद्धांत का समर्थन करने वाले पहले प्रमुख व्यक्तित्व अमेरिकी सीनेटर टॉम कॉटन थे जिन्होंने फॉक्स न्यूज पर यह आरोप लगाया था कि वायरस वास्तव में लैब से उत्पन्न हो सकता है।
और, शायद, सबसे प्रमुख में से एक यह था कि वायरस एक बायोवेपॉन हो सकता है।ET प्राइम की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में चीनी वैज्ञानिकों के एक समूह पर जासूसी करने का आरोप लगाया गया और उनसे कनाडा के नेशनल माइक्रोबायोलॉजी लैब (NML) तक पहुंच बनाई गई, जो कुछ सबसे घातक रोगजनकों पर काम करने के लिए जाना जाता है।एक रिपोर्ट में ऐसा लिखा गया था कि आज भी चीन के वुहान शहर में एक ऐसा लैब हैं जहाँ १५०० से भी ज्यादा वायरस रखे गये है और अगर इस बात में सच्चाई है तो विश्व आने में समय में कितना सुरक्षित है कहना मुश्किल है |
CIDRAP रिपोर्ट के अनुसार कोरोनावायरस के लिए मृत्यु दर 2.3% है जबकि SARS के लिए, यह 9.6% था।
क्या 2% मृत्यु दर का तर्क निराधार है? बहुत से प्रश्न हैं जिन्हें समझना मुश्किल है |
हम बहुत बुरे दौर से गुजर रहे है और शायद आने वाला समय और भी मुश्किल हो | पर, हमें विज्ञान और तकनीक पर भरोसा है कि जल्द ही इसका वैक्सीन तैयार हो जायेगा . तब तक हमें अपने अंदर की मानवता को जीवित रखनी होगी. उम्मीद है, हम जल्द ही बाहर निकलेंगे और सबसे मिलेंगे | पर इस दौर के बीतने के बाद क्या पूरा विश्व चीन को मानवता के आधार पर कभी माफ़ कर पाएगा ?

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